सम्पूर्ण संस्कृत व्याकरण ग्रंथावली / Sampurn Sanskrit Vyakaran Granthavali - भारतीय संस्कृतप्रभा

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Friday, June 25, 2021

सम्पूर्ण संस्कृत व्याकरण ग्रंथावली / Sampurn Sanskrit Vyakaran Granthavali

 सम्पूर्ण संस्कृत व्याकरण ग्रंथावली  / Sampurn Sanskrit Vyakaran Granthawali


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संस्कृत व्याकरण एवम्  साहित्य का सामान्य परिचय ।

भूमिका : -
               इस पेज में हमने संस्कृत व्याकरण की पुस्तक नाम के साथ यहां पर उपलब्ध होगी ऐसा हमारा प्रयास है।   इस पृष्ठ पर हमने सम्पूर्ण संस्कृत व्याकरण  का परिचय देने का प्रयास किया है। हमने प्रयत्न किया है कि यहाँ सारा संस्कृत व्याकरण एवम् साहित्य आ जाएं। यहाँ पर दिए गए व्याकरण की पुस्तकों में हमने लिंक देने का प्रयास किया है ताकि आप किसी भी पुस्तक पर क्लिक करके उसे पढ़ और डाऊनलोड कर सकें।

              ऋग्वेद संसार का प्राचीनतम ग्रन्थ है, यह बात पूरी दुनिया मानती है, परन्तु हमारी सनातन परंपरा के अनुसार चारों ही वेद मानव सृष्टि के प्रारम्भ से ही हैं, जिन्हें परमात्मा ने चार ऋषियों के अन्तःकरण में दिया था। वे चारों वेद हैं- 

                                     वेद
वेद
1. ऋग्वेद - अग्नि ऋषि
2. यजुर्वेद - वायु ऋषि
3. सामवेद - आदित्य ऋषि
4. अथर्ववेद - अङ्गिरा ऋषि

 वेद तथा वेद को समझने के लिए बाद में ऋषियों द्वारा जो ग्रन्थ रचे गए उन सभी को वैदिक संहिता के अन्तर्गत माने जाते हैं। इस प्रकार वैदिक संहिता को चार भागों में बांटा गया है - 

1. संहिता 2. ब्राह्मण 3. आरण्यक और 4. उपनिषद्

इनमें से संहिता में वे चारों मूल वेद आते हैं -
(ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद) 
जो किसी ऋषि अथवा मनुष्य द्वारा नहीं रचे गए हैं अपितु परमात्मा-कृत हैं, अतः इन्हें अपौरुषेय कहा जाता है। अन्य तीन = ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद् - इनको प्रत्येक वेद के आधार पर ऋषियों द्वारा रचे गए हैं। जैसे - ऋग्वेद का ब्राह्मण, ऋग्वेद का आरण्यक और ऋग्वेद का उपनिषद् आदि। 
अतः इनसभी वेदों और ब्राह्मण ग्रंथों को पढ़ने के लिए और भली भांति समझने के लिए उनके कुछ अंग बनाए गए है। जिनको हम आज के समय में वेदाङ्ग के नाम से जानते है वेदाङ्ग को हम वेदों के अंग भी कह सकते है।
वेदाङ्ग की कुल संख्या (6) छह है।

(6) छह वेदाङ्गो के नाम :-

3. व्याकरण, 4. निरुक्त, 
5. छन्द, 6. ज्योतिष
उपरोक्त छः वेदाङ्गों में प्रत्येक में अनेक ग्रन्थ रचे गए हैं, वे निम्नलिखित हैं - 
अभी हम उनमें से व्याकरण और शिक्षा की बात करेंगे। 

                       1. शिक्षा ग्रन्थ -

3. वशिष्ठी शिक्षा
4. व्यास शिक्षा 
5. व्याली शिक्षा 
6. वाशिष्ठ शिक्षा 
7. वर्णरत्न प्रदीपिका 
8. स्वरव्यंजन शिक्षा 
9. शैशिरीय शिक्षा 
10. पारि शिक्षा 
11. स्वरभक्तिलक्षणपरिशिष्ट शिक्षा
12. पदचन्द्रिका 
13. पाराशरी शिक्षा 
14. सिद्धान्त शिक्षा 
15. सर्वसम्मत शिक्षा 
16. षोडश्श्लोकी शिक्षा 
17. शमान शिक्षा 
18. शम्भु शिक्षा 
19. केशवी पद्यात्मिका शिक्षा 
20. अथर्ववेदीया माण्डूकी शिक्षा


                                  व्याकरण
                                पाणिनि कृत

उपरोक्त पाणिनि मुनि द्वारा रचित व्याकरण के 5 ग्रन्थों को समझने हेतु अनेक ऋषियों और विद्वानों ने इनके भाष्य ग्रन्थ लिखे, जिन्हें 'वृत्ति' कहा जाता है।

सर्वप्रथम कात्यायन मुनि ने अष्टाध्यायी पर वार्तिक सूत्रों की रचना की। इसके बाद ऋषि पतञ्जलि ने अष्टाध्यायी पर महाभाष्य ग्रन्थ की रचना की।
इतिहास में व्याकरण के तीन ऋषि माने जाते हैं - 
1. पाणिनि 2. कात्यायन और 3. पतञ्जलि

जब तक इन तीन ऋषियों द्वारा रचित ग्रन्थों को न पढ़ा जाये तब तक व्याकरण को पूर्ण रूप से नहीं समझा जा सकता है। अब आगे अन्य सभी व्याकरण के ग्रन्थों को दिए जा रहे हैं जो अष्टाध्यायी को अथवा व्याकरण को समझने के लिए लिखे गए। व्याकरण में दो सम्प्रदाय चल पड़े हैं - 

दोनों सम्प्रदायों के साहित्य के पुस्तकों के क्रम -

1:- काशिका - वामन, जयादित्य। 
2 :- वाक्यपदीयम् - राजा भर्तृहरि ।
3 :- माधवीया धातुवृत्ति - आचार्य सायण।
4 :- न्यास-पदमंजरी - जिनेन्द्र बुद्धि, हरदत्त मिश्र।
5 :- अष्टाध्यायी भाष्य प्रथमावृत्ति - पं. ब्रह्मदत्त जिज्ञासुु।
6 :- लघुसिद्धान्त कौमुदी -
7 :- मध्यसिद्धान्त कौमुदी -
8 :- वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी ,- 
9 :- वैयाकरणभूषणसारः -
10:- परमलघुमंजूषाा - 
11:- पारिभाषिक: -
12:- परिभाषेन्दुशेखरः -
13:- लघुशब्देन्दुशेखरः -
14:- प्रथमावृति :-
15:- वर्णोचारणशिक्षा :-
16:- धातुपाठ :-
17:- अष्टाध्यायी :- 


1 :- विशेष सूचना ये पेज मुख्यरूप से व्याकरण को लेके बनाया गया है अतः संस्कृत साहित्य के अन्य विषयों को पढ़ने के लिए आप सभी हमारे दूसरे पेज पे जा के पढ़ सकते है। 
2:-  आप सभी से प्राथना है की किसी भी महानुभाव को संस्कृत संबंधित किसी भी पुस्तक की आवश्कता हो तो आप हमे संदेश में बोल सकते है और हमारे  (Facebook . Instagram .Telegram and YouTube  channel पे हमसे बाते कर सकते है।)

3:- यदि कोई भी संस्कृत बोलना अथवा लिखना और व्याकरण पढ़ने का इच्छुक है तो वो हमारी online कक्षाओ के माध्यम से भी पढ़ सकता है ।
मैं आशा करता हु की आप सभीको हमारे ( Bhartiya Sanskrit Prabha) के इस कार्य से प्रसन्नता हुई होगी धन्यवाद जी।

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